“मिशन-समृद्धि”
“घर-घर से रोटी,हर पेट को रोटी”।
“बच्चों को सभ्य सुसंस्कृत जिम्मेदार नागरिक बनाने का दृढ़संकल्प ।
“महिलाओं में जागरूकता एवं नेतृत्व की क्षमता का बोध कराने हेतु प्रयासरत ।”

विश्व स्तर पर भारत राष्ट्र-स्तर पर झारखंडऔर राज्य-स्तर पर पलामू की पहचान भूख गरीबी अशिक्षा बेरोजगारी की विभीषिका झेल रहे अतिपिछडे भूखंड की है।

“मिशन-समृद्धि”गंभीरता पूर्वक  मानती है कि किसी को भी समृद्ध होने के लिए हम तभी उत्प्रेरित कर सकते हैं जब कम से कम वह भूखा-प्यासा न हो ।

हमारा उद्देश्य देश की सबसे बड़ी त्रासदी भूख,अशिक्षा और जागरूकता के अभाव पर केंद्रित है।
“मिशन-समृद्धि” पूर्ण रूप से भूख नहीं मिटा सकती है यह सम्भव नहीं है। लेकिन इसका विकल्प तो ढूँढ ही सकती है और उसने ढूँढ लिया कि कम से कम रात में कोई (आसपास के इलाके में)भी व्यक्ति भूखा न रहे ।

08फरवरी 2016 से यह प्रक्रिया जारी है।’मिशन-समृद्धि’की टीम Tuesday,Wednesday,Saturday, Sunday – इन चार दिनों में अलग-अलग मुहल्लों से रोटी का पैकेट लेकर निर्धारित स्थानों पर जरूरतमंदों तक रोटी पहुँचाती है।
शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो सम्पन परिवार के बच्चे तो प्राइवेट स्कूल से लेकर बड़े-बड़े ट्यूशन ज्वाइन कर लेते हैं वहीं निर्धन परिवार के बच्चे सरकारी स्कूल में जाते हैं वह भी इसलिए कि वहाँ एक टाइम भोजन किताब अन्य सुविधाएँ दी जाती हैं।अन्यथा यह बच्चे तो स्कूल जाना कभी सोच भी नहीं सकते थे ।लेकिन उसके बाद घर आकर उनकी पढ़ाई गाइड लाइन के बिना जारी नहीं रह पाती ।वे इतने सम्पन नहीं कि कोचिंग जाकर पढ़ाई कर सके ।पुनः उनके पास बकरी चराने कचरा चूनने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता ।

यह सब मैंने महसूस ही नहीं प्रत्यक्ष देखती आई हूँ ।चाहती थी कि मैं उन नाॅनिहालों के लिए कुछ कर सकती ।रोटी संग्रह के समय ही कुछ काम वाली महिलाओं ने बड़े ही दुखी अन्दाज में कहा कि बच्चा स्कूल जरूर चला जाता है लेकिन उसके बाद हमलोगों के पास पैसा नहीं है कि कहीं ट्यूशन भेज सके ।मैंने उनलोंगो से कहा कि मेरे घर बच्चों को भेजो ।बस कहना क्या था कि तीन बच्चों का आना शुरू हुआ और सप्ताह दिनों के अ न्दर बच्चे दिन प्रतिदिन बढ़ते चले गये आज करीब 45 बच्चे हैं।

मिशन-समृद्धि “इन बच्चों को सभ्य सुसंस्कृत और जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए दृढ़संकल्प है।
हर्ष इस बात से भी हो रही है कि प्राइवेट स्कूल के बच्चे भी आने लगे हैं ।बच्चे तो बच्चे हैं सबों को जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए ।

वर्तमान में “समृद्धि की पाठशाला “अपने लक्ष्य की ओर मजबूत कदमों से आगे बढ़ता ही जा रहा है ।
“मिशन-समृद्धि”महिलाओं के बीच जागरूकता लाने और उनमें नेतृत्व की क्षमता को बढ़ाने का काम जारी कर दिया है।ताकि वे भी अपने हूनर के अनुसार बेरोजगारी से मुक्ति पा सके ।
“मिशन-समृद्धि”ऐसे सक्षम लोगों से सहयोग और समर्थन के लिए निवेदन करती है ताकि उनके सहयोग से अपने मिशन में सफलता पा सके ।

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